ऐ ददा रे.. छुपा रुस्तम कहें या तुरुप का इक्का, नितेश लहरी ने किया सबको भौचक्का…
sanjha bihaniya… विगत दिनों 30 अगस्त को निर्माता मोहित साहू लेखक,निर्देशक आनंद मानिकपुरी की फ़िल्म ऐ ददा रे श्याम सिनेमा रायपुर सहित सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में 49 सिनेमा हॉल में प्रस्तुत हुई।
ऐ ददा रे जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि फ़िल्म में कुछ तो आश्चर्यजनक है और वास्तव में कहा जाये तो सही मायने में फ़िल्म आश्चर्यजनक ही है।
कॉमेडी के साथ हॉरर का तड़का लिये ये फ़िल्म शुरू से लेकर अंत तक पूरे रोमांच व मनोरंजन के साथ दर्शको को आनंदित व रोमांचित करती है।
लेखक,निर्देशक व मुख्य नायक (हीरो)आनंद मानिकपुरी ने अपनी योग्यता के अनुरूप अच्छा काम किया है व बाकी सहयोगी कलाकारों का काम भी अच्छा ही है पर लगता है शायद नायिका हेमा शुक्ला को सिर्फ शो पीस के रूप में ही इस फ़िल्म में रखा गया है जिसके खाते में सिवाय गाने के कुछ और नही आया है जबकि वो एक अच्छी अभिनेत्री है व उनसे कुछ बेहतरीन काम कराया जा सकता था।
फ़िल्म का गीत -संगीत भी ठीक ठाक ही है, फ़िल्म छूटने के बाद शायद ही कोई गाना होगा जो दर्शकों के ज़ुबान पे चढ़ पाये फिर भी मोनिका व तुषान्त ने अच्छी कोशिश की है।
एक्शन के नाम पर फ़िल्म में कुछ भी नही है। राजू देवदास ने अच्छी सिनेमेटोग्राफी की है। नृत्य के विषय मे यदि कहा जाए तो कंही से भी कोई भी गाना सिनेमा का नही लगता बल्कि उसमे वीडियो एल्बम की झलक दिखती है और लगभग सभी गाने थोपे हुये से लगते है जो फ़िल्म की गति को भी प्रभावित करते हैं।
अभिनय के दृश्टिकोण से यदि देखा जाए तो तांत्रिक के रोल में नवरंग व बंगालन के रोल में मैंडी का काम काफी सरहानीय है, वंही नितेश लहरी ने फ़िल्म के केंद्रीय पात्र (सरपंच) जो कि नायिका के पिता होने के साथ ही एक नज़रिये से कहें तो इस फ़िल्म के सूत्रधार भी है ने अपने अभिनय से फ़िल्म में जान डाल दी है जिसे आप फ़िल्म का छुपा रुस्तम या तुरुप का इक्का भी कह सकते हैं। चुड़ैल के रोल में पिंकी साहू ने शानदार रोल किया है।
अब सोचने वाली बात ये है यदि वो रोल इतना ही पॉवरफुल था तो उसे फ़िल्म के पोस्टर या ट्रेलर में पर्याप्त स्थान क्यों नही दिया गया जबकि ये कहा जा सकता है कि फ़िल्म का सारा भार सिर्फ और सिर्फ उस पात्र के कांधे पर ही टिका है।
खैर ये लेखक,निर्देशक व निर्माता का अपना व्यक्तिगत नज़रिया हो सकता है फिलहाल फ़िल्म अच्छी बन पड़ी है है और एक बार तो ज़रूर देखी जा सकती है।

