सतीश जैन ने फिर दिया नया स्टार, दीपक साहू का भविष्य है उज्जवल
sanjha bihaniya…आज छत्तीसगढ़ी फिल्म मोर छईयां भुइयां 2 रिलीज हुई, इस फिल्म के बाद यह तो स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा को एक नया स्टार मिल गया दीपक साहू के रूप में, फिल्म में और भी कलाकार हैं सभी ने अपने अभिनय के साथ बराबर न्याय किया लेकिन दीपक साहू ही पूरे समय फिल्म में छाए रहे और अंत में भी सात साल की सजा काटकर सात फेरे लेने में भी सफल रहे। फिल्म के एक और हीरो मन कुरैशी शुरू से ही सीधे साधे दिखाए गए, इतने सीधे साधे कि वह कब बाप बन जाते हैं यह भी पता नहीं चला, फिल्म में सारे गीत अच्छे हैं लेकिन गुनगुनाने लायक 24 साल पुराना गीत ही रहा, वह गीत भी अभिनेता दीपक साहू पर ही फिल्माया गया, लेकिन रवि साहू को सिर्फ कुछ सेकेंड के लिए दिखाना खल सा गया क्योंकि इसके पहले की फिल्म हंस झन पगली में रवि साहू ने दमदार अभिनय की छाप छोड़ी थी।
फिल्म की कहानी बताना ठीक नहीं होगा लेकिन अभिनेता दीपक साहू जब मंत्री बन जाते हैं और उनका बड़ा भाई मन कुरैशी उनका पीए बन जाता है तब वह अपने छोटे भाई को भ्रष्टाचार न करने की सलाह देता है लेकिन वह नहीं मानता और जब आईटी का छापा पड़ता है तो भ्रष्टाचार से कमाए गए रूपये दीपक साहू के घर पर ना मिलकर बड़े भाई के घर पर मिलते हैं, बड़े भाई ने अपने छोटे भाई को बचाने के लिए अपनी नौकरी दांव पर लगा दी। पूरी फिल्म में दादा दादी का महत्वपूर्ण रोल रहा लेकिन परिवार उन्हें दरकिनार करता नजर आया, बेटे की नौकरी, बेटे की शादी, बेटे का मंत्री बनना और बेटे का जेल जाना इन सब से दादा दादी को इत्तेफाक ना रखना खल सा गया।
बहरहाल कुल मिलाकर फिल्म एक बार तो देखने लायक है ही लेकिन दर्शक जिस उम्मीद से फिल्म को देखने जा रहे हैं वह उन्हें नहीं मिल रही है। मोर छईयां भुइयां टाइटल और टूरी आइसक्रीम खा के फरार हो गे जी गीत के अलावा पुरानी फिल्म से इस नई फिल्म में और कुछ नहीं है।
यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

