कहानी का उतार चढ़ाव आपको हमेशा बांधे रखेगा और रोमांचित कर देगा, फिल्म का क्लाईमेक्स सबसे ज्यादा मजेदार है- निर्देशक सुभाष जायसवाल
SANJHA BIHANIYA….. कुछ सालों से छत्तीसगढ़ में भी अच्छी फिल्में बन रही है दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंच रहे है और उनका स्वस्थ मनोरंजन भी हो ही रहा है अच्छी बात यह है कि नए नए कलाकार टेक्निशियन उभर कर सामने आ रहे है इन फिल्मों की तारिफ इस लिए भी करनी चाहिए की बॉलीवूड में बनने वाली फिल्मों में क्रू मेंबर जितने का पानी पी जाते है उतना छत्तीसगढ़ के फिल्मों का पूरा बजट होता है, हाल फिलहाल मैने कई फिल्में देखी बजट के हिसाब से इन्हें शानदार की कैटेगरी में रखा जा सकता है ऐसा ही एक फिल्म “माई का लाल रुद्र” 10 मई को पूरे छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में लग रही है, इस फिल्म के निर्देशक सुभाष जायसवाल Subhash Jaiswal है, सुभाष छत्तीसगढ़िया ही है और बिलासपुर के रहने वाले है, 22 साल पहले वह मुंबई चले गया थे वहां अनेक नामी गिरामी (जैसे बालाजी टेलीफिल्मस्) सिरियलों, फिल्मों का निर्देशन कर अब छत्तीसगढ़ के फिल्मों की ओर रुख किया है सुभाष के काम को तो मुंबई के लोग भी लोहा मानते है जिसकी बराबर झलक आपको छत्तीसगढ़ी फिल्म “माई का लाल रुद्र” में देखने को मिल जाऐगा, छत्तीसगढ़ी संस्कृति परंपरा में पला बढ़ा और मुंबईया अनुभव की छाप इस फिल्म में बराबर देखने को मिलेगी, चाहे संगीत पक्ष हो या कहानी का उतार चढ़ाव आपको हमेशा बांधे रखेगा और रोमांचित कर देगा, फिल्म का क्लाईमेक्स सबसे ज्यादा मजेदार है जिसका खुलासा यहां करना ठीक नहीं होगा, कलाकार दीपक और हेमा शुक्ला की अदाकारी में सुभाष जायसवाल का अनुभव साफ झलकता है, अच्छा लगता है कम बजट के बावजूद अब मेरे छत्तीसगढ़ में अच्छी फिल्में बन रही है और लोग देख भी रहें, आशा करता हूं कि इस फिल्म को भी उतनी ही उंचाई मिलेगी और लोग इसे देखने जाऐंगे क्योकि यह फिल्म जरा हट के है याने “सिरतोन बवाल हे”
…नवीन देवांगन

