नफरत की दुनिया को छोड़ कर प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार, क्लोजिंग ही सारा हिसाब बताती है
sanjha bihaniya..निर्माता-निर्देशक जसबीर कोमल की मौत एक सबक छोड़ कर चली गई, सबक यह है कि आप जिन्हें गाहे बगाहे फायदा पहुंचाते हैं वही आपकी मौत मिट्टी में शामिल होंगे अन्यथा नहीं, ये पता नहीं होता,
क्योंकि जिस दिन जसबीर कोमल की मौत हुई उस दिन एक फिल्म भी रिलीज हुई
इन लोगों ने प्रीमियर में पहुंचना ज्यादा जरूरी समझा लेकिन किसी की मौत मिट्टी में पहुंचना जरूरी नहीं समझा, कुछ निर्देशकों का कहना है कि पता ही नहीं चला जबकि सुबह से जसबीर कोमल की मौत की खबर सोशल मीडिया में वायरल होती रही और ये कहते हैं कि इन्हे पता ही नहीं चला
शाम को ये जिमीकांदा के प्रीमियर में पहुंचे, लेकिन ये जसबीर कोमल की अंत्येष्टि में नहीं गये, जसबीर कोमल ने अपनी फिल्म के शुभारंभ अवसर पर जिन्हें मुख्य अतिथि बनाया था, वे भी उनके अंतिम समय में नही आऐ, इनका यह तो फर्ज बनता कि उनको अंतिम बिदाई दे देते उसके बाद जिमीकांदा में चले जाते, लेकिन उन्होंने यह भी गंवारा नहीं समझा।
बड़े दुख की बात है कि छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे भी लोग हैं जो ऐसे समय में सिर्फ ओपनिंग को महत्व देते हैं क्लोजिंग को नहीं। जबकि क्लोजिंग ही सारा हिसाब बताती है।
जसबीर कोमल की अंतिम यात्रा में छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत के दिलीप नामपल्लीवार, राजू नायक, दिनेश साहू, शिवानी चौधरी, दिलीप बैस, विजय मिश्रा “अमित”, सोनू विभार, श्री राम साहू, योगेश मिश्रा, डीएस नाग आदि शामिल हुए।

