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ना देखा ना सुना, पहली बार पंडवानी विधा पर शानदार सम्मान समारोह हुआ संपन्न, कलाकारों के चेहरे पर सम्मान पाकर झलक रही थी खुशी

SANJHA BIHANIYA… कहते हैं जब किसी कार्य को करने की ठान ली जाए और कुछ का साथ मिल जाए तो उस कार्य को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही कुछ हुआ अभिनेता अलीम बंशी के साथ, उन्होंने छत्तीसगढ़ में पंडवानी की जनक पद्मश्री तीजन बाई को समर्पित एक ऐसे पंडवानी सम्मान समारोह का आयोजन कर दिखाया जिसकी चौतरफा प्रशंसा हो रही है। यह आयोजन हुआ राजधानी के शहीद स्मारक भवन में जहां छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मुंबई और कोलकाता से भी पंडवानी के कलाकार पहुंचे। इस कार्यक्रम में उन ढेर सारे कला साधकों का सम्मान किया गया जो अपने अपने स्तर पर पंडवानी को पूरे देश समेत विदेश में भी फैला रहे हैं।

पंडवानी मूलतः महाभारत की कथा का वर्णन होती है, इसे प्रसंगो के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें तंबूरा और रागी का खास महत्व होता है, यह पंडवानी को और रोचक बनाते हैं।

पंडवानी सम्मान समारोह में 27 पंडवानी गायकों, 14 साजिंदों और 50 पंडवानी के प्रस्तुतकर्ताओं को सम्मानित किया गया, साथ ही दर्जनों फिल्म विधा और मीडिया क्षेत्र के महानुभावों का भी सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में कला क्षेत्र से जुड़ी तमाम हस्तियां मौजूद रही और इस भव्य पंडवानी भुइंयां सम्मान की साक्षी बनी। दूर-दूर से आए कलाकारों के चेहरे पर सम्मान पाकर जो खुशी झलक रही थी उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।

कार्यक्रम के आयोजक अलीम बंशी ने बताया कि पद्मश्री तीजन बाई उनकी मां समान है और मां के लिए यह कुछ नहीं, उनके लिए जो भी किया जाए वह कम है। उन्होंने पंडवानी के उभरते कलाकारों से अपील की कि पंडवानी जैसी विद्या जो अपने आप में अकेली है इसे उस मुकाम तक पहुंचाएं की छत्तीसगढ़ को पूरे विश्व में पंडवानी के नाम से पहचाना जाए।

 

 

 

 

 

अलीम ने उन सभी कलाकारों का धन्यवाद किया जो दूर-दूर से इस कार्यक्रम में शामिल हुए और अपनी प्रस्तुतियां दी। अलीम ने फिल्म जगत के निर्माता निर्देशकों और कलाकारों का भी धन्यवाद किया साथ ही मीडिया जगत के लोगों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफल आयोजन के लिए प्रशासन को भी धन्यवाद दिया।

 

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