परेतिन जैसी नकारात्मक शक्ति को सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत करती फिल्म सुकवा
SANJHA BIHANIYA… आज श्याम सिनेमा रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न सिनेमा घरों में निर्माता गजेंद्र श्रीवास्तव व निर्देशक मनोज वर्मा की फिल्म सुकवा प्रदर्शित हुई, फिल्म की कहानी फिल्म की मुख्य पात्र सुकवा जो की एक परेतिन (डायन या चुड़ैल) है पर आधारित है। आमतौर पर छत्तीसगढ़ के गांवों में बुजुर्गों की मानें तो परेतिन या टोनही जैसी शक्तियों को बहुत ही नकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाता है, अक्सर वह दूसरों का बुरा ही करती है, कभी किसी का भला नहीं करती है, जैसे किसी के पति को मार देती है, किसी के बच्चे को उठाकर अपने साथ रख लेती है, उसका शोषण करती है उसको खा जाती है वगैरह वगैरह, लेकिन सुकवा में ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया गया है बल्कि इसके विपरीत बहुत ही सकारात्मक तरीके से इस फिल्म की परेतिन को दर्शाया गया है, जो एक बच्ची का लालन पालन भी करती है और बाकायदा उसकी शादी करवाने में भी सहायता करती है ।

फिल्म की कहानी छत्तीसगढ़ के लिए नयी जरूर हो सकती है पर ऐसी कहानी साउथ में अथवा विदेशी फिल्मों में अक्सर देखी जा सकती है। सभी कलाकारों ने अच्छा काम किया है सभी अपने-अपने पात्र में बखूबी जमे हैं, फिल्म का छायांकन भी अच्छा है और संपादन भी अच्छा है, गीत संगीत भी मधुर व कर्ण प्रिय है, कुल मिलाकर अगर कहा जा सकता है कि ये फिल्म सपरिवार देखने योग्य है। वैसे जहां भी परेतिन या टोनही जैसी नकरात्मक शक्तियों का नाम आता है तो वहां पर डर का होना स्वाभाविक है लेकिन इस फिल्म में जरा सा भी कहीं पर भी डरने की संभावना नहीं है बल्कि ये फ़िल्म डर के विपरीत हंसाती व गुदगुदाती नज़र आती है।
एक हिसाब से देखा जाए तो निर्देशक मनोज वर्मा ने यहां पर एक नए तरीके का प्रयोग किया है कि हॉरर के साथ-साथ कॉमेडी, ट्रेजेडी,एक्शन,इमोशन, ड्रामा,गीत-संगीत सभी का समावेश डाला है। अगर हम सही मायने में यह कहे कि यह एक हॉरर बेस्ट फुल एंटरटेनमेंट मसाला मूवी है जिसे सपरिवार देखा जा सकता है तो ये कतई गलत नहीं होगा।


