राष्ट्रीय स्तर का नाटक खेल चुके कलाकार को आखिर पहचान मिली हंडा से, डोकरा बबा का रोल निभाया है हंडा में इस कलाकार ने
SANJHA BIHANIYA…. बहुचर्चित छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्म हंडा में व्हीलचेयर पर बैठे एक बुजुर्ग कलाकार को अब लोग हंडा के डोकरा बबा के नाम से जानने लगे हैं। यह डोकरा बबा कोई और नहीं बल्कि दुर्ग के कलाकार विनायक अग्रवाल है, इन्होंने कला के क्षेत्र में अपनी सारी उम्र लगा दी, इस दौरान उन्होंने चौक चौराहों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक नाटकों का मंचन किया। लेकिन उन्हें जिस तरह की पहचान आज मिल रही है वह बीते 50 सालों में कभी नहीं मिली, यह कहना खुद विनायक अग्रवाल का है।
विनायक अग्रवाल किसी परिचय के मोहताज नहीं है लेकिन उन्हें इतने दिनों बाद पहचान मिलने से दिल में थोड़ी खीज जरूर है। उन्होंने बताया कि उन्होंने दुर्ग के सफदर हाशमी चौक पर ढेर सारे नाटक प्ले किये, इन नाटकों को क्षितिज रंग शिविर नाम की संस्था के बैनर तले किया जाता था जिनमें मुर्गीवाला और हम क्यों नहीं गाते प्रमुख रहे। मुर्गीवाला के तो कई राष्ट्रीय मंचन भी हुए जिसमें विनायक अग्रवाल के साथ जाने-माने निर्माता निर्देशक संतोष जैन जी अभिनय किया करते थे। विनायक अग्रवाल भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत थे, 2014 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने फिल्मों में सक्रियता दिखाते हुए कई ऑडिशन दिए। इतने वरिष्ठ कलाकार होने के बाद भी ऑडिशन देने पहुंच जाया करते थे विनायक अग्रवाल लेकिन ऑडिशन लेने वाले जब जान जाते थे कि यह विनायक अग्रवाल है तो उन्हें बिना ऑडिशन दिए ही सिलेक्ट कर लिया करते थे। इस तरह विनायक अग्रवाल ने ढेर सारी छत्तीसगढ़ी फिल्में भी की कुछ एक रिलीज हुई कुछ एक नहीं हुई, लेकिन हंडा के रिलीज होते ही उन्हें सब पहचानने लगे। आज हंडा ने आय और विऊ के सारे कीर्तिमान तोड़ दिए। फिल्म के कलेक्शन और लोगों की भीड़ ने फिल्म को हिट बना दिया।
बहरहाल विनायक अग्रवाल को इस फिल्म के हिट होने से सबसे ज्यादा खुशी हो रही है, उन्होंने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें व्हीलचेयर पर उबड़ खाबड़ रास्तों पर चलाया जाता था जिसके कारण वह काफी थक जाया करते थे लेकिन फिर भी उन्होंने बखूबी अपना अभिनय किया, जो पर्दे पर साफ दिखाई देता है।
आज हंडा ने अपनी सफलता के झंडे गाड़कर साबित कर दिया है की कभी-कभी फिल्म में फेस वैल्यू ना भी हो तो भी फिल्में हिट हो सकती है।

