रायपुर का ऐसा कला साधक जो आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करता है और गीत संगीत में रुचि रखते हुए लिख रहा है एक नया आयाम
SANJHA BIHANIUA RAIPUR…रायपुर जिले के नगर पालिक परिषद बीरगांव क्षेत्र के सरोरा गांव में दिनांक 22,12, सन 1984 को जन्मे *कमलेश कुमार साहू* बचपन से ही प्रतिभावान हैं। अपनी सुमधुर आवाज और गायकी से छत्तीसगढ़ में उभरते हुए लोक गायक के रूप में मजबूत छवि स्थापित कर चुके हैं।
बचपन से ही स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया जी ,स्व. मिथलेश साहू , कुलेश्वर ताम्रकार और दुकालू यादव जी को अपना आदर्श और प्रेरणामूर्ति मानने वाले कमलेश साहू स्वयं गीतों की रचना करते और गीतों को खुद गाते हैं। अपने गीतों के लिए एल्बम की स्क्रिप्ट भी स्वयं लिखते हैं। और अभिनय करते हैं।
घर में संगीत का माहौल ना होने के बावजूद जसगीत व भजन गाते हुए अपनी कड़ी मेहनत और लगन से लोक गायकी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं । वर्तमान में इनके द्वारा लिखे और गाए सुपरहिट छत्तीसगढ़ी गीत ” *छत्तीसगढ़ के दुलरवाबेटा* , *मंजूर पांखी तोर नैना ,भाई बहिनी के निर्मल नाता* जैसे देशभक्ति गीत काफी लोकप्रिय हो रहा है।
कमलेश साहू वर्तमान में अपने नए प्रोजेक्ट देशभक्ति गीत कारगिल विजय के निर्माण में व्यस्त हैं। अभी इनकी आगामी गीतों और एल्बमों की लिस्ट काफी लंबी है।
निजी जीवन में सादा और सरल जीवन जीने वाले *कमलेश साहू,,( संस्कृत विभाग में शिक्षक व योगाचार्य के रूप में कार्यरत हैं*) चित्रकारी और मूर्तिकला में भी महारत होने के साथ साथ अच्छे वक्ता भी है।
इनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति और भारत की सभ्यता को अपने गीतों के माध्यम से प्रदर्शित करना है और ऐसे गीतों का निर्माण करना है जिसे पूरा परिवार एक साथ देख सुन सके जिनमें फ़ूहड़ता और अश्लीलता ना हो।
वर्तमान में “” *सुग्घर छत्तीसगढ़* ” नामक छत्तीसगढ़ी लोककला मंच के संस्थापक हैं जिनमें 20 सदस्यों की टीम काम कर रही है।

