सनिमा

गिरवर दास मानिकपुरी को नहीं भूल पाएगा छत्तीसगढ़ी सिनेमा, आज हुआ है उनका निधन

sanjha bhaniya…सबसे पहले उनको अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, गिरवर दास मानिकपुरी आज हमारे बीच नहीं रहे। जब यह खबर सोशल मीडिया में वायरल हुई तब से लेकर अब तक उनकी श्रद्धांजलि में हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गिरवर दास मानिकपुरी एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को एक से बढ़कर एक गीत दिए जिन गीतों के बदौलत फिल्में सुपर डुपर हिट हुई। आपको याद होगा छत्तीसगढ़ी फिल्म झन भूलो मां बाप ला उस फिल्म का टाइटल सॉन्ग भी उन्होंने ही लिखा था, जो आज भी सुना जाता है। हो सकता है कि उनके जैसा गीतकार दोबारा पैदा ना हो इसमें कोई अति संयुक्ति नहीं है। जैसे ही उनके निधन की खबर वायरल हुई सभी के होश उड़ गए कि अचानक ऐसा कैसे हो गया सभी ने कहा 2024 में जाते-जाते हैं छत्तीसगढ़ी सिनेमा को एक झटका दे दिया। सब निशब्द हैं स्तब्ध हैं ऐसा कैसे हो गया।

गिरवर दास मानिकपुरी एक ऐसे नाम है जो छत्तीसगढ़ के कला जगत में बहुत प्रसिद्ध थे उनकी रचनाएं, उनके गीत आज भी लोगों के जहन में है, उनका जाना पूरे छत्तीसगढ़ के साथ ही छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। अब ऐसे गीत कौन लिखेगा जो लोगों के दिलों में घर कर जाते हैं। नए गीतकारों से तो ऐसी उम्मीद की नहीं जा सकती जो ऐसे दिल को छू लेने वाले गीत लिख सकें, क्योंकि नए गीतकारों के पास मुंदरी, बिछिया, सोन के मुंदरी, सोन के मछली और पता नहीं क्या-क्या गीत होते हैं जो बनाए जाते हैं सुने जाते हैं और लोग पसंद भी कर लेते हैं लेकिन वह क्षणिक होते हैं।

लेकिन गिरवर दास मानिकपुरी की लिखे गीत आज भी एक दर्द बयां करते हैं जिनको सुनकर इंसान अपने अतीत में खो जाता है। जाने-माने निर्माता निर्देशक सतीश जैन ने लिखा है कि गिरवर भैया ने मेरी दो फिल्मों में गीत लिखे और वह फिल्में सुपरहिट हुई उनकी कमी कभी पूरी नहीं होगी उनका जाना मेरे लिए और हमारी इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति है। हम सभी यह कामना करते हैं कि गिरवर दास मानिकपुरी जी को भगवान अपने श्री चरणों में स्थान दें।

 


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