कला जगत

इसीलिए कोई नहीं बन सकता प्रेम साईमन, उसने झोंक दी थी अपनी जिंदगी कला की कढ़ाई में

SANJHA BIHANIYA… प्रेम साईमन एक ऐसा नाम है जिसे आज के लोग भले ही ना जानते हो लेकिन वह भी एक दौर था जब प्रेम साईमन के नाटकों को लोग देखने के लिए टूट पडते थे, प्रेम साईमन ने कई नाटक लिखे और निर्देशित भी किया जिसमें मुर्गीवाला, विरोध, हम क्यों नहीं गाते, अरण्य गाथा जैसे कई नाटक शामिल है,

दुर्ग का सफदर हाशमी चौक आज भी गवाह है प्रेम साइमन के नाटकों के मंचन के लिए जहां जब कलाकार इकट्ठा होते थे तो लोग भी इकट्ठा हो जाते थे सिर्फ यह देखने के लिए की आज कौन सा नाटक प्ले हो रहा है और क्या यह प्रेम साइमन द्वारा लिखित और निर्देशित है।

उस दौर में मोबाइल नहीं था कुछ एक घरों में टेलीफोन हुआ करते थे उसी के जरिए लोग एक दूसरे को इसकी सूचना दिया करते थे कि आज प्रेम साइमन के नाटक का मंचन होने वाला है और लोग जुटने लगते थे, भीड़ इतनी हो जाती थी कि पुलिस को आना पड़ता था लेकिन सब कुछ इतना सहज होता था जिसकी कल्पना आज तो नहीं की जा सकती।
प्रेम साइमन के सबसे प्रिय कलाकारों में संतोष जैन और विनायक अग्रवाल का नाम आता है, ये वह नाम है जो आज भी कला के प्रति समर्पित ही हैं, उम्र के इस पड़ाव ने भी उनके कला प्रेम में कभी बाधा नहीं डाल पाई।

प्रेम साइमन द्वारा लिखित कहानी पर छत्तीसगढ़ में दो फिल्में भी बनाई गई जो काफी प्रचलित भी रहीं, लेकिन उनके द्वारा लिखित नाटक मुर्गीवाला के सबसे ज्यादा शो हुए, कम से कम 500 शो की जानकारी प्राप्त हुई है, यह शो भोपाल, शिमला और नागपुर तक में किए गए। शो से प्रभावित होकर अभिनेता मदन पुरी ने नागपुर में शो करने वाले अभिनेता संतोष जैन को सम्मानित भी किया।

मुर्गीवाला नाटक को सुब्रत और अमोल पालेकर ने भी प्ले किया। कुल मिलाकर प्रेम साईमन एक ऐसा नाम है जो अमिट है, जब भी फिल्मों के दौर में कला जगत का नाम आएगा तो सबसे पहले प्रेम साइमन का नाम लिया जाएगा।

उनकी जयंती पर सादर नमन।


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