“कका जिंदा हे” अच्छी पटकथा और अभिनय की हुई सराहना लेकिन प्रस्तुतीकरण कमजोर रहा
संझा बिहनिया… 13 अक्टूबर को रिलीज हुई छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्म “कका जिंदा हे” को देखकर निकले लोगों ने कहा की फिल्म की कहानी तो अच्छी है और अभिनय भी ठीक-ठाक है लेकिन अच्छा प्रस्तुतीकरण और फिल्मांकन नहीं होना फिल्म के लिए नागवार साबित हुआ। फिल्म का टाइटल अट्रैक्टिव है बावजूद इसके दर्शन सिनेमा घर नहीं पहुंच रहे हैं क्योंकि फिल्म को देखकर निकले लोगों ने इसकी सकारात्मक माउथ पब्लिसिटी नहीं की वरना फिल्म को देखने दर्शन जरूर पहुंचते। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिल्म के निर्माता निर्देशकों ने फिल्म बनाने के बाद प्रचार प्रसार में ध्यान नहीं दिया जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा की कका के नाम से ही दर्शक दौड़े चले आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिलीज के पहले दिन जो भी लोग पहुंचे उन्होंने भी फिल्म देख कर कहा की फिल्म का प्रस्तुतीकरण निराशाजनक रहा। फिल्म का टाइटल, कहानी और अभिनय अच्छा है लेकिन उसे ठीक से परोसा नहीं जा सका। बहरहाल “कका जिंदा हे” भी उन्हें फिल्मों की श्रेणियां में आ गई जो उनके पूर्व लगी थी। फिल्म के प्रस्तुतकर्ता अमन पिक्चर्स ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हुए फिल्म लगभग 22 सिनेमाघरों में रिलीज करवाया,जिसके मार्फ़त फिल्म लोगों तक पहुंची

