साफ सुथरी व सामाजिक संदेश देने वाली कहानियों की दिशा में फिल्म *कबड्डी* पहली कड़ी है – निलेश सिंघानिया
sanjha bihaniya…छत्तीसगढ़ी फिल्म कबड्डी के सह निर्माता निलेश सिंघानिया का परिचय
*संस्थापक विश्वस्त व राष्ट्रीय सचिव*
• डॉ लाजपतराय मेहराज् न्युरोथेरेपी अकादमी
• आरोग्य विकास फाउंडेशन
*सचिव*
आरोग्य भारती – मुंबई
• तीन दशक से अधिक प्रिंटिंग इंडस्ट्री में अनुभव
• करीब २५ से अधिक वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक
करीब ६-७ वर्षों से मातृशक्ति पर केंद्रित साफ सुथरी व सामाजिक संदेश देने वाली कहानियों पर काम हो रहा है। उसी दिशा में फिल्म *कबड्डी* पहली कड़ी है।
हमारे माता पिता, गुरु, संत व संस्कृति ने बताया है कि *ईश्वर ने अपनी परछाई के रूप में माँ को बनाया है*
हमारी संस्कृति में भगवान के नाम के पहले भी माँ लक्ष्मी अर्थात मातृशक्ति का नाम लिया जाता है।
ईश्वर ने मनुष्य जीवन के सृजन का दायित्व भी मातृशक्ति को ही दिया है।
हमें बचपन से पढ़ाया जाता है
*नारी का सम्मान जहाँ है, संस्कृति का उत्थान वहाँ है*
*सशक्त नारी, उज्ज्वल भविष्य*
कलयुग में हमारी शिक्षण प्रणाली की कमजोरी, ध्वस्त होती सामाजिक और सामूहिक परिवार की विचारधारा, आधुनिकता का दुष्प्रभाव और दूषित पश्चिमी संस्कृति के प्रति आकर्षण ने मातृशक्ति की गरिमा को बहुत ज्यादा गिरा दिया है।
मुझे ऐसा लगता है कि फिल्म एक सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा संस्कृति को पुनर्जीवित किया जा सकता है, संस्कारों को जागरूक किया जा सकता है, इतिहास के अनेक उदाहरणों द्वारा नारी को उसकी शक्ति, जिम्मेदारी, आवश्यकता व गरिमा से परिचय कराया जा सकता है।

